Stock market learning Part 04 | पूंजी बाजार की उत्पत्ति

Stock market learning Part-04

Stock market learning Part 04 – कई कंपनियां पूंजी बाजार से शेयर पूंजी जुटाती हैं। शेयर पूंजी जुटाने के लिए शेयरों, ऋण प्रतिभूतियों, सावधि जमा, आदि का उपयोग किया जाता है।

पूंजी बाजार में निवेशक के लिए प्रमाण पत्र जिसे ‘ऋण’ के रूप में स्वीकार किया जाना है| जो सुरक्षित है लेकिन कंपनी को अपनी जिम्मेदारी के बारे में पता है उसे डिबेंचर कहा जाता है। कुछ इसे बॉन्ड कहते हैं। जिन  निवेशक को  पैसा सुरक्षित, लेकिन ब्याज यथोचित चाहिए, ऐसे निवेशक इसमें शामिल होते है| जिनका रवैया कम जोखिम स्वीकारना होता है।

संशोधित कंपनी अधिनियम, 1999 के अनुसार, ऋण प्रतिभूतियों की कुछ विशेषताएं

1) ऋण प्रतिभूतियों में ऋण वापसी की तारीख होती है।

2) सामान्य तौर पर,कंपनी की संपत्ति को सुरक्षा के रूप में गिरवी 

3) एक निश्चित दर पर नियमित लेकिन सहमत किए गए दर पर ही ब्याज  देना होता  है ।

4) इस तरह का ऋण बंधन एक हस्तांतरणीय दस्तावेज है।

5) बॉन्डेज का प्रमाण पत्र उधारकर्ता को देना होता है ।

6) कर्जरोखाधारक कम्पनीका धनका होता है.उसे रिफंड वापस करनेका करार होता है|

Stock market learning Part 04

जब कोई कंपनी किसी ट्रस्टी या मध्यस्थ को जनता को ऐसे बांड बेचने के लिए नियुक्त करती है, तो वे उन्हें चुकाने के लिए उत्तरदायी नहीं होते हैं। इसे शेयरों की तरह ही बेचना पड़ता है। इसके लिए सेबी की मंजूरी और आवेदक के लिए विवरणिका का प्रकाशन आवश्यक है। इसे आवंटित किया जाना है और शेयर बाजार में शेयरों के माध्यम से शेयर पूंजी जुटाने की विधि लगभग समान है। इसका कार्य प्राथमिक तौर पर प्राथमिक बाजार में होता है। इसके लिए, सेबी शेयर बाजार में कंपनी को सूचीबद्ध करने पर जोर देता है। क्योंकि यह निवेशक की रक्षा करता है।

ऑनलाइन ट्रेडिंग तरीका, नई यांत्रिकी पद्धति  की वजह इसमें  अधिक पारदर्शिता आ रही  है। शेयर्स द्वारा पूंजी जुटाने का आधिकारिक तरीका है। इसकी भी जानकारी हमे आगे मिलेगी ।

ऋण प्रतिभूतियों के प्रकार निम्नलिखित नुसार

1) डीप डिस्काऊंट बॉण्ड

2) रजिस्टर्ड डिबेंचर्स

3) अनरजिस्टर्ड डिबेंचर्स

4) रीडेमिबल डिबेंचर्स

5) इरीडेमिबल डिबेंचर्स

6) अपरिवर्तनीय कर्जरोखे नॉनकन्व्हर्टेबल डिबेंचर्स

7) फुल कन्व्हर्टेबल डिबेंचर्स

8) पार्टली कन्व्हर्टेबल डिबेंचर्स

9) वॉरंट बॉण्ड

10) डिस्काऊंट डिबेंचर्स

11) सेक्युअर्ड डिबेंचर्स

12) अनसेक्युअर्ड डिबेंचर्स

13) अटॅच वॉरंट बॉण्ड 

14) डिटॅच वॉरंट बॉण्ड

15) ॲदर बॉण्ड/डिबेंचर्स

निवेशकों के बदलते समय और वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऋण प्रतिभूतियों की प्रकृति में कई बदलाव हो रहे हैं। यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

कंपनी टर्म डिपॉजिट: Stock market learning Part 04

कई बार कुछ कंपनियां टर्म डिपॉजिट के जरिए निवेशकों से पूंजी जुटाती हैं। ऐसी सावधि राशि जमा करते समय,वह न्यूनतम बारह और अधिकतम छत्तीस महीने की अवधि के लिए होती है । कंपनी अधिनियम की धारा 58A नियम 2 (B) के अनुसार ऋण राशि पर ब्याज का भुगतान किया जाता है।

ऐसे टर्म डिपॉजिट निवेशक की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग होते हैं। जैसे संचित या गैर-संचित जमा। नियमित ब्याज भुगतान जमा, एकमुश्त जमा राशि। इस प्रकार कंपनियां सावधि जमा के माध्यम से शेयर पूंजी जुटाती हैं।

पूंजी बाजार में अन्य कारकों के माध्यम से भी धन आता है

1. म्यूचुअल फंड

2. विदेशी निवेशक 

3. कंपनियों के शेयर

4. वित्तीय संस्थान 

5. सामान्य निवेशक 

6. बैंक 

7. बड़े निवेशक 

8. अन्य कारक

तो चलिए शेयर बाजार की (Stock market learning) सैर करते हैं। शेयर बाजार की सीरीज

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